Success Stories

Success Story - 8ग्राम - केरलापाल , विकासखण्ड - नारायणपुर, जिला नारायणपुर (छ.ग.) के कृषक
कृषक श्री महेष राम

पूर्व स्थिति:- श्री महेष राम नेताम एक प्रगतिषील कृषक है जो स्वयं के 5.50 एकड़ में धान कोदो कुटकी व देषी मक्का कुल्थी रामतिल इत्यादि की खेती परंपरागत तरीके से खेती करते थे लेकिन देषी बीज एवं वैज्ञानिक विधि से खेती करने की तरीका नही मालूम होने के कारण कृषि से आमदनी कम होती थी जिससे आर्थिक कठिनाई का सामना करना पड़ता था ।

वर्तमान स्थिति:- कृषि विज्ञान केन्द्र में संचालित विभिन्न प्रकार के प्रषिक्षण एवं भ्रमण में उपस्थित होकर फसल पद्धति अवलोकन करने पश्चात इन्होने मरहत व मध्यम भूमि में धान स्थान पर मक्का की खेती (रवि) सब्जियां 0.58 वि व 0.50 गर्मी तथा आम के बगीचा 0.25 एकड़ का वैज्ञानिक तकनीकी अपना कर अधिक आय अर्जित कर रहे है । साथ ही साथ केन्द्र के व जिला पंचायत के माध्यम से जैविक खाद बनाने हेतु (वर्मीकम्पोस्ट टांका) का निर्माण किया है ।

Success Story - 7ग्राम - बिंजली , विकासखण्ड - नारायणपुर, जिला नारायणपुर (छ.ग.) के कृषक
कृषक श्री रामा उसेण्डी

श्री रामा, ग्राम - बिंजली के किसान है जिसने मषरूम के फायदे को समझ कर मषरूम की खेती कर अपनी आमदनी बढाई है । व्यर्थ में पड़े पैरे से पैसा कमाना रामा को भा गया इसलिये रामा मषरूम की ट्रेनिंग लेने के उपरांत अपने घर में मषरूम की खेती करनी शुरू की समय समय पर कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक की देख रेख एवं उचित प्रबंधन के सुझाव के कारण मषरूम का उत्पादन अच्छी होने लगी जिससे श्री रामा के अंदर आत्म विष्वास जगा आज रामा मषरूम की खेती के तौर तरीके के बारे में दूसरे किसानों का पूर्ण सहयोग करता है जिससे की अन्य लोगों की आमदनी भी बढ़ने लगी है । इस खेती में लागत सिर्फ एक बार और देख-रेख के नाम पर सिर्फ पानी की व्यवस्था के उचित समय पर ध्यान कराया है यह खेती महिलाओं के बीच ज्यादा लोकप्रिय हो रहा है ।

Success Story - 6ग्राम - आमगांव , विकासखण्ड - ओरछा, जिला नारायणपुर (छ.ग.) के कृषक
कृषक श्री राजु वड्डे

भारत के मानचित्र में छत्तीसगढ़ भारत के हृदय स्थल में बसा हुआ है, परंतु इस हृदय में इसी प्रदेष के नारायणपुर जिला बहुत महत्वपूर्ण है यही वह जिला है जहां के लोग पूरे देष में जाने जाते है । आदिवासी बाहुल एवं नकस्ल समस्या सें जुझ रहे जिला है जहाॅ पर खेती करना एक चुनौती है जंगल बाहुल क्षेत्र होने के कारण लाख की खेती की सम्भावना बहुत ही ज्यादा है ।
इसी कड़ी में राजु वड्डे ने नई पहल की है । चूॅकि यहां की जीविका वनों के उत्पादन पर निर्भर है । ऐसे में लाख की खेती वरदान साबित सिद्ध हुई - कृशि विज्ञान केन्द्र, नारायणपुर के वैज्ञानिक श्री रंजीत कुमार मोदी के तकनीकी सहयोग के माध्यम से राजु वड्डे ने लाख की सफल खेती लाख पालन के उन्नत तौर तरीका जैसे विहन के रख-रखाव एवं स्थानांतरण एवं इनके साथ-साथ कीट प्रकोप एवं रोग के लक्षण तथा रोकथाम के उपाय संबंधी सविस्तार जानकारी ली ।
इसके अन्तर्गत राजु वड्डे ने बिंजली के प्रयत्नषील किसान महादेव से लाख की बीज खरीद कर अपने पेड़ पर इसकी खेती षुरू की आज ऐसी स्थिती है कि अपने गांव आमगांव में लाख की खेती के कारण काफी प्रसिद्ध हो चुके है । जुलाई के महिने में लाख की फसल की कटाई हुई जिसे 25-30 किलो लाख की प्राप्ति हुई जिससे की अच्छी आमदानी हुई इस पुः लाख के बीज के अन्य 4 पेड़ों में बीज लगाया है वहां के लोग इसके कार्य से काफी सुख है और सीख भी ले रहे है ।

Success Story - 5ग्राम - देवगांव , विकासखण्ड एवं जिला नारायणपुर (छ.ग.) के कृषक
कृषक श्री महेष राम देवांगन

जिला-नारायणपुर में किसानों के बीच कठिन परिश्रम एवं नवीन सोच रखने वाले श्री महेष देवांगन जी अपने गांव-देवगांव नहीं बल्कि नारायणपुर जिले में जाने जाते है, श्री महेष जी षुरू से ही कर्मक एवं कुछ नये करने की कोषिष करने वाले इंसान है, घर की पैतृक भुमि है, जिसमें कि पुरानी पद्धती में खेती होती आ रही थी जिसमें की बहुत अधिक लाभ नहीं मिलता है, श्री महेष जी ने कहीं बाहर जाने की अपेक्षा यहीं रहकर कृशि वैज्ञानिकों के सहयोग से कुछ नया करने की ठानी षुरूआत के दिनों में धान का उत्पादन 13-15 क्विटल प्रति एकड़ होता था परन्तु वैज्ञानिक सोच एवं तकनीकी का ज्ञान का उपयोग कर धीरे धीरे उत्पादन बढ़ाते गये, जो पहुंच कर 20-21 क्ंिवटल प्रति एकड़ पहुच गई श्री महेष जी को उतने में भी सन्तुशठ नही थे 25-30 क्ंिवटल प्रति एकड़ तक पहुचना था इसके लिऐ उन्होने वैज्ञानिको से सभी बारीकीयां जैसे उचित बीच का चयन, नर्सरी का रख रखाव, खरपतवार एवं कीट नियंत्रण, साथ में जल प्रबंधन का भी ज्ञान लिया और धीरे धीरे धान का उत्पादन 25 क्विंटल प्रति एकड़ से अधिक पहुचने में भी सफल हो गये । खरीफ के अलावा रबी में चार एकड़ में मक्का की खेती करते है
जिससे लगभग 30-35 क्ंिवटल प्रति एकड़ उत्पादन कर रहे है, जिससे लगभग 35-40 हजार रूपया प्राप्त करते है, विकास के सफर में उन्होने धान के अलावा बंजर भूमि जहां पर की पिछले पचास साल से खेती नही हो रही थी उनके प्रयास से एक एकड़ में बैंगन की खेती जिससे की एक लाख रूपया आमदानी प्राप्त किया ।
खेती के अलावा मुर्गी पालन, सब्जी के खेती एवं साथ में कृशि संबंधी यंत्र जैसे - ट्रेक्टर, रोटा वेटर, धान कटाई के लिऐ रीपर एवं थ्रेसींग मषीन किराऐ पर देते है जिससे अतिरिक्त आमदनी होती है । श्री महेष जी साल भर में लगभग 3 लाख रूपया की आमदनी प्राप्त करते है । उनके प्रयास से देवगांव, गढबेंगाल, छोटेडोगर एवं आस पास के छोटे किसान इनसे प्रेरित होकर धान के अलावा सब्जियों के खेती करने लगे है, उनकी सफलता के कारण लोग उसे अपना विकास पुरूश मानते है, श्री महेष देवांगन के अच्छी सोच एवं उन्नत कृशि कार्य के कारण उनको इंदिरा गांधी कृशि विष्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ एवं गुजरात सरकार द्वारा सम्मानित हुऐ है ।

Success Story - 4ग्राम बिंजली, विकासखण्ड एवं जिला नारायणपुर (छ.ग.) के कृषक
कृषक श्री महादेव

ग्राम बिंजली, विकासखण्ड एवं जिला नारायणपुर (छ.ग.) के कृषक श्री महादेव, पिता संुदर अपनी जीविका के चलने के लिए अपनी पंरपरागत खेती में सिर्फ धान लेता था धान के अलावा वह अपने बाड़ी में कुछ सब्जियों की खेती भी करता था । जिसमें उसकी आमदनी बहुत कम थी । कृषि विज्ञान केन्द्र, नारायणपुर के वैज्ञानिक की सलाह एवं कुषल मार्गदर्षन से आज महादेव पाॅच कुसुम का पेड़ पर लाख की खेती कर प्रत्येक पौधे से 20-25 किलो लाख प्राप्त कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहा है । चुंकी नारायणपुर जिले में कुसुम के पेड़ बहुतायत मात्रा में पाये जाते है सही जानकारी न होने के कारण यहाॅं के स्थानीय किसान इससे फायदा नहीं उठा पा रहे है । बिंजली के प्रयत्नषील किसान महादेव ने कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञाानिकों के मार्गदर्षन पर टी.एस.पी. योजना के तहत लाख की खेती का ट्रेनिंग लेकर अपने बाड़ी एवं आसपास में लगे कुसुम के पेड़ पर लाख की खेती की । इस खेती के आरंभ में कृषि विज्ञान के सहयोग से लाख के बीज की व्यवस्था की गई अब वक्त ऐसा है कि आगे की खेती एवं बाजार के लिये महादेव स्वयं से तैयार किया लाख की बीज से अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहा है बिंजली गाॅव के लिए महादेव एक प्रगतिषील किसान साबित हुआ है । जिससे गांव के अन्य किसान भी इस खेती के लिये प्रेरित हो रहे है बहुत ही हर्ष का विषय है की महादेव के खेती से प्रेरित होकर ओरछा के किसान राजु वड्डे पिता श्री सोनाऊ, ग्राम - आमगांव ने इस वर्ष लाख के खेती करने के लिये उनके खेत पर भ्रमण कर स्वयं के खर्च पर 5 किलो ग्राम कुसुम लाख की बीज खरीद कर लाख की खेती का आरंभ कर दिया है । जिससे ओरछा क्षेत्र में भी लाख की खेती का अकुंरण देखने को मिलेगा । जिससे किसान लाभान्वति होगे।

Success Story - 3ग्राम मांहका, विकासखण्ड एवं जिला नारायणपुर (छ.ग.) के
कृषक श्री धनीराम कुमेटी

ग्राम मांहका, विकासखण्ड एवं जिला नारायणपुर (छ.ग.) के कृषक श्री धनीराम कुमेटी, पिता स्व. श्री सोमारूराम कुमेटी, जाति गोड़ (आदिवासी), ग्राम माहका का निवासी है, सामान्य रूप से कृषि, पशुपालन, मुर्गी पालन करते थें, इनके पास कुल 14.50 एकड़ जमीन है, जिसमें से 12 एकड़ में खरीफ में धान लेते है, और लगभग 1.30 एकड़ जमीन में उड़द, कुटकी एवं कुल्थी एवं कुछ में सब्जी लगाते थे, जिससे इनकी आमदनी लगभग 1.5-2 लाख रूपये धान से एवं सब्जी से 30-40 हजार तक आय प्राप्त करते थे। कृषि विज्ञान केन्द्र, केरलापाल के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन, एवं आत्मा योजनान्तर्गत प्रशिक्षण, भ्रमण कर कृषि के नई तकनीकों से प्रभावित होकर इन्होने सिंचाई व्यवस्था हेतु एक बोर एवं एक कुआॅ बनवाया और अब कृषि के साथ-साथ उद्यानकी, पशुपालन, मुर्गी पालन करते हैं, इन के पास कुल 14.50 एकड़ जमीन है, जिसमें से 11 एकड़ में खरीफ में धान लेते है, और लगभग 2 एकड़ जमिन में पपीता, उड़द, मूंग एवं सब्जी उत्पादन करते है, साथ ही साथ रबी में 4 एकड़ भूमि में करेला, लौकी, बरबटी, टमाटर, ककड़ी का फसल लेते है, जिसमें गोबर की खाद का ही उपयोग करते है। धान उत्पदन करने हेतु लगभग 1.5-2 लाख रूपये खर्च कर लगभग 3-3.5 लाख रूपये तक का आय प्राप्त करते है, साथ ही खरीफ में सब्जी उत्पादन हेतु लगभग 15-20 हजार खर्च कर 50-60 हजार रूपये तक एवं रवी मौसम में फल एवं सब्जी फसल में लगभग 25-30 हजार खर्च कर फल एवं सब्जी से लगभग 80-90 हजार, एवं मुर्गी पालन में लगभग 15-20 हजार तक खर्च कर लगभग 40-45 हजार रूपये तक आय प्राप्त करते है। वर्तमान में इनके पास 2 ट्यूवेल, 2 ट्रेक्टर, 1 बोलेरो एवं 2 डिजल पंप है। इस प्रकार से फसल उत्पादन में कुल खर्च लगभग 2.5 लाख खर्च करके, कुल आमदनी लगभग 4.5-5.80 लाख तक प्राप्त करता है।

Success Story - 2 Crop diversification: Introduction of Rabi Maize

नरायणपुर जिले में मुख्य रूप कृषकों द्वारा ली जाने वाली फसलें धान, मक्का, लघु धान्य फसलें, दलहन एवं लघु वनोपज जैसे- महुआ, टोरा, तेंदू पत्ता, साल बीज, चार चिरौंजी आदि है। जनजातीय बहुल जिला नारयणपुर में ज्यादातर कृषक साधन विही हैं जिससे वे कृषि के अधिक लागत वाले उन्नत व आधुनिक तकनीकों को अपनाने में असमर्थ महसूस करते हैं जिससे कृषि उत्पादन व उत्पादकता बहुत कम है। मृदा के प्रकार के अनुसार नारयणपुर जिले में चार कृषि परिस्थितियाॅ हैं- भाटा-एन्टीसोल ;कंकरीली पथरीली युक्त उच्चहन भूमिद्ध, मटासी-इन्सेप्टीसोल, डोरसा-अल्फीसोल एवं कन्हार- वर्टीसोल। सिंचाई का समुचित साघन व चराई के समस्या के कारण लगभग 90-95 प्रतिशत् कृषक खरीफ में धान फसल लेने के पश्चात् खेतों को खाली छोड़ देते हैं। मक्का फसल हेतु यहां की जलवायु बहुत उपयुक्त है जिसकी खेती पूरे वर्ष भर की जा सकती है। जिले में मक्के ही असीम संभवनाओं को ध्यान में रखते हुये कृषि विज्ञान केन्द्र, नारायणपुर द्वारा व्यापक तौर पर इसके पौष्टिक व आर्थिक महत्व का प्रचार-प्रसार किया गया एंव कृषकों को इसकी खेती हेतु प्रोत्साहित करते हुये, खरीफ, 2013 में 13 एकड़ क्षेत्र में संकर व उन्नत किस्म के मक्का का प्रदर्षन किया गया। जिसकी उत्पादकता श्व बाजार मुल्य को देखकर कृषकगण बहुत प्रभावित हुये एवं रबी में बहुत से कृषकों ने इसकी खेती करने हेतु अपनी इच्छा जाहिर की जिसके मद्देनजर, रबी एवं बसंतकालीन प्रदर्शन के अंतर्गत आईसोपाम योजनान्तर्गत आंचलिक परियोजना निदेषालय, जोन-7 से 60 एकड़ एवं आत्मा योजनान्तर्गत कृषि विभाग, नारायणपुर से 20 एकड़ क्षेत्र हेतु प्रदर्ष लेकर 68 कृषकों के खेतों पर प्रदर्शित किया गया, जिसका अनुकरण करते हुये जिले के लगभग 100 अन्य किसानों द्वारा स्वयं ही मक्के की बुवाई की गई। वर्तमान में किसानों की उत्साह देखकर यह अंदाज लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में जिले के अंदर मक्का का क्षेत्रफल कई गुना बढ़ जायेगा।

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Success Story - 1 Transfer of technology to disadvantaged area: Abujhmarh

It is well known fact that the farmers of Abujhmarh-Orchha are traditionally backward, poor and quite ignorant about technical know-how of modern agriculture. The entrepreneurship and scientific value orientation are very poorly developed in the people and they live on only subsistence farming and collection of non timber forest produces. In spite of the rich potentiality of the district to grow excellent horticulture crops of fruit, vegetables and ornamental plants, the area of development is low. It is on account of lack of consciousness, inadequate and lack of infrastructure facilities with regard to marketing, storage, processing and packaging etc. non availability of quality input in time to farmers possess grand constraint affecting agriculture production and income to a great extent. Due social problems, the government machineries will not reach to disturbed areas and Govt. schemes not easily and run and tribal peoples are not benefited. If any Govt. agency will try to work or implement any schemes in these areas, have heavy losses of manpower and money. In spite of the problems mentioned above, KVK, Narayanpur has been transferring modern agricultural technologies to that particular area not only by quality input supply but also by organizing extension activities and distribution of technical literatures as table below.

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